AI Assistant vs. गूंगी स्मार्टनेस: जब फोन समझदार बनने से इनकार कर देता है


(AI Assistant vs. Dumb Smartness: When Your Phone Refuses to Be Intelligent)


अखबार कहते हैं कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) दुनिया बदल देगा। पर ज़रा मेरे फोन में बसे 'स्मार्ट' असिस्टेंट से तो बात करवाइए! उसकी 'कृत्रिम' बुद्धिमत्ता पर तो रोबोट भी शर्मा जाए।


कल मैंने उसे आवाज़ दी, "ओके गूगल, मेरे लिए एक रोमांटिक गाना बजाओ।" इस बुद्धिमान साथी ने क्या किया? उसने 'ओं शांति ओं' का भजन चला दिया! शायद उसने मेरे चेहरे को देखकर फैसला किया कि इस आत्मा को रोमांस नहीं, आत्मिक शांति की ज़्यादा ज़रूरत है।


यही नहीं, एक बार जल्दी में था, बोला "ओके गूगल, मुझे नज़दीकी ATM दिखाओ।" इस महाशय ने मुझे नज़दीकी 'AIIMS' (हॉस्पिटल) के रास्ते दिखा दिए! शायद उसे लगा कि पैसे नहीं हैं, तो सीधे अस्पताल का रास्ता पूछो। भई, इतनी दूर की सोच हमारे नेताओं में भी नहीं होती!


और तो और, यह 'स्मार्ट' फोन हमेशा गलत समय पर जागता है। पूरे दिन तो सोया रहता है, पर जैसे ही आप कोई गुप्त बात करने बैठें, अचानक बोल उठता है - "मैंने नहीं सुना, क्या आप दोहराना चाहेंगे?" पूरा कमरा शांत... सबकी नज़रें आप पर... और आप समझाते फिरें - "अरे नहीं, मैं... उससे... वो... बात कर रहा था।"


इनका तो सबसे बड़ा जुनून है हमारी बोली हुई हर बात को लिखना! एक बार मैंने गुस्से में कहा - "ये फोन तो बहुत ही बेकार है।" अगले ही पल मैंने गूगल पर सर्च करते देखा - "बेकार फोन को सही तरीके से रीसायकल कैसे करें?" डर गया मैं! लगा कहीं यह खुद को कबाड़े वाले के यहाँ बेचने का रास्ता न ढूंढ ले।


पर इन सबके बीच एक सच्चाई यह है कि जब यही 'गूंगा' AI सही काम कर देता है, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। हम फोन को थपथपाते हैं, जैसे कोई चालाक बच्चा कोई काम कर दे। शायद यही हमारा और AI का रिश्ता है - एक गुस्सैल, मगर प्यारा झगड़ा। क्या आपका फोन भी ऐसी ही 'स्मार्ट' हरकतें करता है?

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